1• रावण के दादा जी का नाम प्रजापति पुलत्स्य था। जो ब्रह्मा जी के दस पुत्रो में से एक थे। इस तरह रावण ब्रह्मा जी का पड़पोत्र हुआ। रावण ने अपने पिता और दादा की तरह धर्म का साथ ना देकर अधर्म का रास्ता अपनाया था।
2•रावण को आयुर्वेद का भी बड़ा ज्ञान था। उसने अर्ध प्रकाश नाम की एक पुस्तक भी लिखी जिसमे आयुर्वेद से जुडी बातो का उल्लेख है।
3• रावण को वेदों का बड़ा ज्ञान था । सामवेद के अलावा उसे सभी वेदों का ज्ञान था। यह तक की उसे पद – पथ मई भी महारथ हासिल थी। पद – पथ ही वेदों के अध्ययन का एक मात्र तरीका है।
4•रावण ने सीता माता से पहले माता कौशल्या का हरण किया था। क्योंकि रावण जानता था कि उसकी मृत्यु कौसल्या और दसरथ के पुत्र के हाथों होगी।
5• रावण को मायावी इसलिए खा जाता था क्योंकि वो तंत्र मंत्र , सम्मोहन विद्या, और भी कई तरह के जादू टोने में पारांगत था।
